त्तराखंड: कॉलेज भवन धंसने के बाद सहमा घाड़ क्षेत्र, रतमऊ नदी के बहाव ने बढ़ाई मुश्किलें

धनौरी में हुए हादसे के बाद अब घाड़ क्षेत्र में चिंताएं बढ़ने लगी हैं। हालत यह है कि घाड़ क्षेत्र में कई जगह कब भू धंसाव हो जाए इसका भी कोई अंदाजा नहीं है। कहने का तो घाड़ क्षेत्र है जहां रेत उड़ती है, इसी क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाली रतमऊ नदी कई जगहों पर अपना असर दिखाती है। सामान्य तौर पर तो ऊपर रेत बहता है, लेकिन नीचे पानी की धारा चलती रहती है।

कॉलेज में भवन धंसना स्वाभाविक है, क्योंकि खेत में बने इस कॉलेज की दीवारों में दरारें कब से दिखने लगी थीं। हालांकि हादसे अनजान कॉलेज ने प्रशासनिक सहयोग के लिए अपना दरवाजा खोला। गनीमत रहा कि हादसा उस समय नहीं हुआ जब कक्षाएं संचालित हो रही थीं। पीएसी के जवान और हादसे की सूचना त्वरित पहुंची और क्विक रिस्पॉस का नतीजा सामने आया।थाने से पांच मिनट का रास्ता रुड़की से महज दस मिनट क्विक रिस्पॉस का नतीजा

एसपी देहात अभय प्रताप सिंह का कहना है कि घटना स्थल पर क्विक रिस्पॉस का कारण समय से सूचना और उचित दूरी रही। उनका कहना है कि महज पांच मिनट का रास्ता थाने का है और रुड़की से पहुंचने अधिकतम 15 मिनट। सबसे खासियत की घटना होते ही स्थानीय निवासी, शेष पीएसी कर्मी और कॉलेज प्रबंधन तक सभी ने सहायता नंबरों पर काॅल किया।इसका परिणाम रहा कि जब तक लोग सोचते इतनी देर में फायर, आपदा राहत दल, पुलिस और घटना स्थल पर स्वयं मौजूद पुलिस बल के जवान सभी आपसी समन्वय और तकनीकी साधन से जान बचाने का पूरा प्रयास किए। यह अलग बात है कि जवान की जान चली गई लेकिन सकुशल रेस्क्यू का यह एक उदाहरण है। एसपी देहात ने कहा कि सही समय पर सही सूचना अगर दी जाए तो ऐसे तमाम हादसों में लोगों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि स्थानीय टीमें लगातार पहुंचीं, महत्वपूर्ण यह है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने सूचना सेट पर प्रसारित होते ही सभी तंत्र को सक्रिय कर दिया।

प्राधिकरण का अधिकार क्षेत्र फिर भी नहीं हो किया जा रहा मृदा परीक्षण

घाटी और घाड़ क्षेत्र क्षेत्र में विशेषज्ञ मृदा परीक्षण के बाद ही निर्माण करने की सलाह देते हैं। बता दें कि हरिद्वार जैसी जगह पर आज तक हेलीपैड या एयरपोर्ट की परिकल्पना पूरी नहीं हो सकी इसका कारण रहा कि यहां के मिट्टी परीक्षण के बाद प्रस्ताव फेल होते गए। लक्सर क्षेत्र में एयरपोर्ट या हेलीपैड बनाने की योजना करीब एक दशक पूर्व तय की जा रही थी, लेकिन मिट्टी के परीक्षण में यह संभव नहीं हो सका। धनौरी क्षेत्र में कई सरकारी भवनों की हालत जर्जर है। सबसे ज्यादा बुरा हाल उत्तर प्रदेश के अधीन आने वाले सिंचाई विभाग के भवनों का है। सिंचाई विभाग के एक जर्जर भवन में पुलिस चौकी भी चल रही है। जहां हमेशा खतरा बना हुआ है। धनौरी में गंग नहर के आसपास उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अनेक भवन हैं। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद भी इन भवनों पर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग का स्वामित्व है। उचित देखभाल और मरम्मत के अभाव में अधिकतर भवन गिराऊं हालत में है।

चल रही चौकी भी खतरे की जद में

स्थानीय लोगों के अनुसार सिंचाई विभाग के कई भवन लंबे समय से मरम्मत के अभाव में जर्जर होते जा रहे हैं। भवनों की दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं, वहीं कई स्थानों पर छत और प्लास्टर भी खराब हालत में हैं। अधिकतर भवन खाली पड़े हैं और इनका उपयोग नहीं किया जा रहा है, लेकिन यहां पर एक भवन ऐसा है, जिसमें पुलिस चौकी संचालित हो रही है। जहां पुलिसकर्मी दिनभर जर्जर भवन में बैठकर काम करते हैं वहीं स्थानीय लोगों की आवाजाही थी पुलिस चौकी में बनी रहती है। ऐसे में भवन की जर्जर हालत सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन भवनों का तकनीकी निरीक्षण कराकर आवश्यक मरम्मत नहीं कराई गई तो बरसात अथवा किसी अन्य कारण से भवन का कोई हिस्सा गिर सकता है और जान-माल का नुकसान हो सकता है। लोगो का कहना है कि विशेष रूप से पुलिस चौकी वाले भवन की स्थिति का तकनीकी परीक्षण कराकर पुलिसकर्मियों और आमजन की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था की जाए।

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