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मूल रूप से पिथौरागढ़ जिले की रहने वाली यशस्वी ने शूटिंग को अपना लक्ष्य बनाकर लगातार मेहनत की। उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम रहा कि वह लगातार तीन वर्षों तक भारतीय टीम का हिस्सा रहीं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए उत्तराखंड की पहचान राष्ट्रीय शूटिंग मानचित्र पर मजबूत की।
पांच साल से बेस्ट शूटर का खिताब
यशस्वी के कोच अक्षय आनंद ने बताया कि उनकी उपलब्धियों में एक और खास बात यह है कि वह पिछले पांच वर्षों से उत्तराखंड की बेस्ट शूटर का खिताब अपने नाम करती आ रही हैं। प्रतियोगिताओं में सबसे तेज स्कोर करने और लगातार बेहतर प्रदर्शन के चलते उन्हें यह सम्मान मिला है। लगातार पांच वर्षों तक इस खिताब को बरकरार रखना उनकी निरंतरता, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ ही यशस्वी ने राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया है। वह सात बार नेशनल प्रतियोगिता में राज्य की ओर से प्रतिभाग कर चुकी हैं। जबकि तीन बार नेशनल गेम्स और दो बार खेलो इंडिया में भी वह अपने अचूक निशाने का हुनर दिखा चुकी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन के चलते उन्होंने प्रदेश की उभरती हुई निशानेबाजों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
खेल के साथ यशस्वी अपनी पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान दे रही हैं। वर्तमान में वह ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही हैं। पढ़ाई और खेल दोनों के बीच संतुलन बनाते हुए वह अपने शूटिंग कॅरिअर को भी आगे बढ़ा रही हैं। यशस्वी की उपलब्धियां उत्तराखंड के उन युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का सपना देखते हैं। पिथौरागढ़ से निकलकर भारतीय टीम तक का सफर तय करने वाली यशस्वी ने साबित किया है कि प्रतिभा, निरंतर अभ्यास और मेहनत के दम पर किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। यशस्वी ने 11 साल की उम्र से ही इस खेल में ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी थी। वो जूनियर और यूथ कैटेगरी में कई पुरस्कार हासिल कर चुकी हैं।