उत्तराखंड के 11 नगर निगमों समेत 100 निकायों में आज बृहस्पतिवार को मतदाता अपने घरों से बाहर निकलेंगे। अभी तक राजनीतिक दलों के उम्मीदवार और उनके समर्थक अपने पक्ष में मतदान की अपील करने के लिए उनके दरवाजे पर पहुंचे थे। अब मतदाताओं की बारी है। मतदान केंद्र के अंदर वोट की चोट से वे किसी उम्मीदवार की चुनावी नैया पार लगाएंगे तो किसकी डुबा देंगे।
प्रदेश और अधिकांश निकायों में सत्तारूढ़ होने की वजह से भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर है तो वहीं सत्तारोधी रुझान के दम पर कांग्रेस नगर निगमों से लेकर नगर पालिका और नगर पंचायतों में उलटफेर करने की उम्मीद लगाए बैठी है। उधर, भाजपा और कांग्रेस में उभरे असंतोष और भड़की बगावत का लाभ उठाने के लिए निर्दलीय भी ताक में हैं।
दांव पर भाजपा की प्रतिष्ठा
निकाय चुनाव के नतीजों से पता चलेगा कि इन तीन नगरपालिकाओं को नगर निगम का दर्जा देने का दांव किसके पक्ष में रहा। 2018 में हुए चुनाव में भाजपा ने देहरादून, ऋषिकेश, हल्द्वानी, काशीपुर और रुद्रपुर नगर निगमों में जीत दर्ज की थी। इन सभी निकायों में पार्टी ने मेयर का टिकट काटकर नए चेहरों पर दांव लगाया है। देखना होगा कि पार्टी का यह प्रयोग कितना कामयाब होता है। 17 नगर पालिकाओं में भी भाजपा पिछली बार जीती थी। पार्टी के सामने इन सभी नगर पालिकाओं में वापसी करने की चुनौती है। करीब 21 निकायों में भी भाजपा को अपनी प्रतिष्ठा बचानी है।
2018 में जहां भाजपा जीती
नगर पालिका : गोपेश्वर, कर्णप्रयाग, मुनिकी
रेती, नरेंद्रनगर, विकासनगर, शिवालिक नगर, लक्सर, पौड़ी, दुगड्डा, पिथौरागढ़, डीडीहाट, धारचूला, गंगोलीहाट, बागेश्वर नगर, लोहाघाट, चंपावत व टनकपुर
नगर पंचायत : नौगांव, गौचर, पीपलकोटी,
नंदप्रयाग, पोखरी, थराली, ऊखीमठ, अगस्त्यमुनि, कीर्तिनगर, गजा, लंबगांव, झबरेड़ा, सतपुली, द्वारहाट, भिक्यासैंण, बनबसा, कालाढुंगी, दिनेशपुर, गुलरभोज, सितारगंज
विकास और विरासत के ऐतिहासिक कामों पर जनता सभी नगर निगमों में कमल खिलाने जा रही है। कांग्रेस हार की बौखलाहट में तुष्टीकरण के चोले में आ गई।
– महेंद्र भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
प्रचार में दिखाया दम, कांग्रेस को जीत की उम्मीद
लोकसभा व विधानसभा चुनाव में मिली हार जवाब देने के लिए नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस पूरी ताकत के साथ उतरी। चुनाव प्रचार के दौरान भी कांग्रेस दिग्गज एकजुट नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा, पूर्व सीएम हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक प्रीतम सिंह, गणेश गोदियाल, पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत, शूरवीर सिंह सजवाण, हीरा सिंह बिष्ट, नवप्रभात समेत पार्टी के सभी विधायक व पूर्व विधायक चुनाव प्रचार में एकजुटता के साथ दमखम दिखाया। लेकिन कुछ निकायों में पार्टी नेताओं की नाराजगी सामने आई। चुनाव के ऐन वक्त पर पार्टी नेताओं ने भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस को झटका भी लगा। इसके बावजूद कांग्रेस ने चुनाव रण में विरोधियों का सामना किया।
2018 में दो निगमों में जीती कांग्रेस
कांग्रेस ने पूरी ताकत के साथ निकाय चुनाव लड़ा है। पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी मेहनत से काम है। लोगों में भाजपा सरकार के प्रति नाराजगी है। निकायों में कांग्रेस शानदार जीत हासिल करेगी।
-करन माहरा, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस

