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रामपुर तिराहा गोलीकांड: हाईकोर्ट सख्त, CBI से 15 दिन में मांगी केस की स्थिति रिपोर्ट

उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए बहुचर्चित रामपुर तिराहा गोलीकांड मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को निर्देश दिया कि वह 15 दिनों के भीतर मामले की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करे।

न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ में हुई सुनवाई में केस संख्या 42/1996, जिसमें तत्कालीन मुजफ्फरनगर के डीएम अनंत कुमार सिंह आरोपी हैं, की प्रगति पर सवाल उठाए गए। कोर्ट ने पूछा कि इतने वर्षों बाद भी मामले की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने कहा कि पूर्व में भी अदालत ने केस की स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन न तो उत्तर प्रदेश सरकार और न ही सीबीआई की ओर से कोई ठोस जवाब दिया गया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए सीबीआई को 15 दिन के भीतर स्पष्ट स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

सीबीआई की ओर से दलील दी गई कि राज्य गठन से पहले यह मामला सुप्रीम कोर्ट और फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास रहा। बाद में यह उत्तराखंड हाईकोर्ट के माध्यम से देहरादून से मुजफ्फरनगर ट्रांसफर हुआ। हालांकि, इसके बाद केस की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी, जिसके लिए एजेंसी ने समय की मांग की।

यह मामला वर्ष 1994 के उत्तराखंड आंदोलन से जुड़ा है, जब 2 अक्टूबर को दिल्ली कूच कर रहे आंदोलनकारियों के साथ मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में पुलिस द्वारा कथित तौर पर बर्बरता और गोलीकांड की घटना हुई थी। इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, जिसने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

याचिकाकर्ता और आंदोलनकारी अधिवक्ता मंच के अध्यक्ष रमन साह ने इस केस को देहरादून से मुजफ्फरनगर स्थानांतरित करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अब कोर्ट के निर्देश के बाद सभी की नजरें सीबीआई की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस लंबे समय से लंबित मामले की दिशा तय कर सकती है।

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