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84 दिन भूखे रहे… फिर भी इतिहास में गुम ! अब दिल्ली से उठी बड़ी मांग

नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हिमालयी क्षेत्र के पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानी श्रीदेव सुमन को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने की मांग उठाई। कार्यक्रम में भारत सरकार से श्रीदेव सुमन की स्मृति में डाक टिकट जारी करने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई।

पर्वतीय लोकविकास समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. सूर्य प्रकाश सेमवाल ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में 84 दिन तक भूख हड़ताल करने वाले एकमात्र क्रांतिकारी श्रीदेव सुमन के योगदान को इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक और वैचारिक कारणों से उनके संघर्ष और बलिदान को सीमित कर दिया गया।

प्रो. सेमवाल ने कहा कि टिहरी आज भी उपेक्षा और बदहाली का शिकार है। उन्होंने कहा कि पिछले 76 वर्षों में टिहरी को केवल आश्वासन मिले, लेकिन विकास की असली रोशनी यहां तक नहीं पहुंच सकी। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखंड को विभिन्न योजनाओं और आर्थिक पैकेजों के जरिए बड़ी सहायता दी गई, लेकिन टिहरी के दूरस्थ क्षेत्रों तक उसका लाभ नहीं पहुंच पाया।

उन्होंने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि वे “देशविरोधी कॉकरोच अभियानों” से दूर रहकर अपने गांव, संस्कृति और पहाड़ के विकास के लिए काम करें। साथ ही आगामी टिहरी दौरे के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi को टिहरी की 76 वर्षों की उपेक्षा और बदहाली पर एक श्वेतपत्र सौंपने की बात भी कही गई।

कार्यक्रम में पूर्व राज्यमंत्री और टिहरी जिले के पूर्व भाजपा अध्यक्ष मेहरबान सिंह रावत ने मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के नेतृत्व में राज्य में हो रहे विकास कार्यों की चर्चा करते हुए टिहरी के दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का भरोसा दिलाया। समिति के सचिव संजय तड़ियाल ने शिक्षा, स्वास्थ्य और महिलाओं के उत्थान पर विशेष योजनाओं की जरूरत बताई। वहीं वरिष्ठ पत्रकार मुरार कंडारी ने युवाओं को खेल, साहसिक पर्यटन, पर्यावरण और लोकसंस्कृति से जोड़ने वाले प्रोजेक्ट शुरू करने की मांग की।

कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि श्रीदेव सुमन केवल टिहरी या उत्तराखंड के नहीं, बल्कि पूरे देश के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक हैं और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर वह सम्मान मिलना चाहिए जिसके वे हकदार हैं। कार्यक्रम की शुरुआत उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री B. C. Khanduri को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई।

 

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