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प्रेमनगर से पांवटा साहिब तक हाईवे निर्माण में अंडरपास की मंजूरी, परियोजना पर 1594 करोड़ रुपये का खर्च

प्रेमनगर से विकासनगर के बीच स्थानीय मांगों के कारण बल्लुपुर-पांवटा साहिब हाईवे परियोजना का निर्माण कार्य कई जगहों पर दस महीने से रुका है। अधिग्रहित भूमि पर कब्जा नहीं मिलने के कारण निर्माण नहीं हो रहा। डीएम सविन बंसल ने जब मौके पर जाकर निरीक्षण किया तो कार्य रुका हुआ मिला। पड़ताल में सामने आया कि ग्रामीणों की अंडरपास की मांग है।

इसे पूरी न होने के कारण सड़क नहीं बनने दे रहे हैं। डीएम ने ग्रामीणों से वार्ता कर एनएचएआई से दो अंडरपास मंजूर करा दिए। अब हाईवे का काम रफ्तार पकड़ेगा। जिलाधिकारी सविन बंसल ने प्रेमनगर में बल्लूपुर पांवटा साहिब हाईवे के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। निरीक्षण में हाईवे का निर्माण कार्य बंद मिला। विभागीय व एनएच अफसरों से वार्ता में सामने आया कि क्षेत्रीय निवासी अंडरपास की मांग कर रहे हैं। एनएचएआई नियमों के कारण ग्रामीणों की मांग पूरी नहीं कर पा रहा है।

इसलिए ग्रामीण जमीनों पर कब्जा नहीं दे रहे और निर्माण रुका हुआ है। डीएम सविन बंसल ने ग्रामीणों व एनएच के अफसरों के साथ वार्ता कर समस्या का निस्तारण किया। डीएम ने बताया कि जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के कारण प्रेमनगर, विकासनगर के अलावा सुद्धोवाला में जमीन का कब्जा ग्रामीण नहीं दे रहे थे। ग्रामीण प्रत्येक गांव में एक अंडरपास मांग रहे थे। नियम के अनुसार 300 मीटर से पहले अंडरपास नहीं बन सकता।

ग्रामीणों की मांग पूरी नहीं होने के कारण 10 महीने से काम रुका था।ग्रामीणों से वार्ता कर दो अंडरपास मंजूर करा दिए गए हैं। ग्रामीण अब सहमत हैं। कब्जे की प्रकिया जल्द शुरू की जाएगी। बताया कि प्रेमनगर में एक अन्य विवाद का निस्तारण करा दिया गया है। इसमें भी मुआवजा किश्त ग्रामीणों को मिल गई है। बताया कि आशारोड़ी झाझरा बाईपास के लिए 40 हेक्टेयर क्षतिपूरक वन भूमि भी एनएच को दे दी गई है। इससे अब मसूरी जाने वाले वैकल्पिक मार्ग का भी जल्द निर्माण शुरू हो सकेगा।

परियोजना पर 1594.33 करोड़ रुपये खर्च
बल्लूपुर-पांवटा साहिब सड़क परियोजना के लिए 1594.33 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। दो चरणों में प्रस्तावित प्रोजेक्ट को फरवरी 2025 तक पूरा करना है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से 45 किमी इस मार्ग का निर्माण दो पैकेज में किया जा रहा है। पैकेज- टू (बल्लूपुर चौक से मेदनीपुर) का काम चल रहा है, जबकि पैकेज-वन (मेदनीपुर से पांवटा साहिब) तक काम हो रहा है।

उत्तराखंड-हिमाचल के 25 गांवों के किसानों की ली है जमीन
परियोजना के तहत उत्तराखंड और हिमाचल के कुल 25 गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है। इसमें उत्तराखंड के 21 गांवों के किसानों की 127 हेक्टेयर जमीन और 9.2 हेक्टेयर जमीन हिमाचल के चार गांवों के किसानों की अधिग्रहित की गई है। जमीन के बदले किसानों को कुल 588.33 करोड़ रुपये मुआवजे का भुगतान किया गया है। पांवटा साहिब, हरबर्टपुर, सहसपुर, सेलाकुई और सुद्धोवाला को बाईपास करते हुए करीब 22 किमी लंबाई का ग्रीन फील्ड तैयार किया जा रहा है। इसके बनने से दून-पांवटा की दूरी पांच से सात किमी तक कम हो जाएगी। इससे मार्ग पर चलने वालों के समय और ईंधन की बचत होगी।

कई जगहों पर स्थानीय मुद्दों के कारण अवरोध आ रहा था, उनका निस्तारण कर लिया गया है। अब जल्द निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा।

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