अब धराली में न जाने कब यात्रियों का रैला दिखाई देगा। कभी यहां के होटलों में रौनक रहती थी। शाम हो या दोपहर यात्रियों की चहल-कदमी से पूरे क्षेत्र में चहल-पहल बनी रहती थी लेकिन अब यहां वीरानी छाई है। पुराने दिनों को याद कर भावुक होती आपदा प्रभावित तीरथी देवी कहती हैं कि आंखों के सामने ही पूरा भरा-पूरा धराली पल भर में आपदा की भेंट चढ़ गया। कई बहुमंजिला होटलों और घरों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है।
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